महासमुंद : मृत व्यक्ति के उपलब्धियों व सुधारात्मक पक्ष का समीक्षा जरुरी -गेंदलाल कोकडिया
फिरोज खान संभाग प्रमुख रायपुर
Mon, Mar 9, 2026

मजदुरी कर , श्मशान घाट में घर बनाकर बेटे को शिक्षक बनाया था -गेंदलाल कोकडिया
श्रद्धांजलि सभा,जीवन विद्या अध्ययन
आधारित प्रेरणादाई -परिवारजन

जीवन रुप में सब समान है, गीत ने शोकाकुल परिवार को ढाढस बंधाया
शरीर यात्रा की समीक्षा & जीवन का प्रयोजन समझना ही मृत्यु संस्कार
मृत्यु संस्कार का वास्तविक प्रयोजन स्पष्ट करती है जीवन विद्या -कोकडिया

जीवन विद्या अध्ययन आधारित मृत्यु संस्कार मानव समाज को एक करने वाला
महासमुंद:- जीवन विद्या अध्ययन आधारित मृत्यु संस्कार कार्यक्रमश्री घांसी राम जांगड़े जी का बहुत अच्छे तरह से सम्पन्न हुआ, कार्य क्रम में महासमुन्द, बागबाहरा, धमतरी, अभनपुर, रायपुर, दुर्ग,बलोदा बाजार, पिथौड़ा,आदि अनेक स्थानों से जीवन विद्या से जुड़े परिवार जन शामिल हुए, जीवन विद्या अध्ययन आधारित श्रद्धांजलि सभा के बारे में विस्तार से बताते हुए मृत्यु संस्कार कार्यक्रम के बारे में संचालक शिक्षक श्री गेंदलाल कोकडिया मानवीय शिक्षा शोध केंद्र तेंदुवाही ने बताया कि जीवन विद्या अध्ययन आधारित मृत्यु संस्कार कार्यक्रम में परिवार व मृत व्यक्ति से जुड़े सभी परिजन व शुभचिंतक मृत व्यक्ति के शुभ -अशुभ,पाप -पुण्य, उचित -अनुचित, मंगल-अमंगल,कार्यों का ,और शरीर यात्रा की उपलब्धियों व सुधारात्मक पक्षों का समीक्षा करते हैं,और ये जरूरी है,ताकि आगे आने वाली पीढ़ियों को स्पष्ट मार्गदर्शन मिले व मृत व्यक्ति के द्वारा किये गये अच्छे विचारों और कार्यों को लेकर ही समाज आगे बढ़े,बाबू जी श्री घासीराम जीके शुभ कार्यों का , भावों का, संस्कारों का सहयोग का स्मरण किया गया, मृत व्यक्ति के किये अच्छे कार्य को स्मरण करने से मरणोत्तर जीवन में उत्तम संस्कारों की स्थापना होती है,मृत जीवन को उत्तम शरीर धारण करने में सुविधा होती है ,मृत्यु संस्कार कार्यक्रम में शिव कुमार जांगड़े भाई जी, अपने स्वर्गीय पिता जी के पूण्य कार्यों को स्मरण करते हुए बताये ,कि पिताजी परिश्रम कर,मेहनत कर ,जीवन यापन कर मुझे शिक्षक बनाये, परिवार के बेटा, बहू सरस्वती ने पिता तुल्य सज्जन व्यक्ति व श्री सोनी जांगड़े ने सबको साथ लेकर चलने वाले,समधी,ने अच्छा मित्र,नाती सिद्धार्थ ने परिश्रम पूर्वक जीवन यापन पर ध्यान दिलाने वाले व पत्नी द्वारा बाबूजी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त किया गया,बसंत साहू भैया ने जीवन है,शरीर नश्वर है पर,पूनम दीदी जी ने नये स्वस्थ शरीर धारण करने के लिए जीवन शरीर त्याग करता है,पर दुर्ग से,राखी गेंदलाल कोकडिया दीदीजी तेंदुवाही ने सास ससुर भी माता पिता तुल्य हैं ,बहु बेटी तुल्य है, बाबू जी समदर्शी व्यक्ति थे,पर, प्रवीण भैया विनीता दीदी जी राजिम अभनपुर से स्वागत भाव व परिवार के महत्व पर, पवित्रों यादवभैयाजी, नंदलाल भैयाजी, बागबाहरा से जीवन की अमरता व सच्चाई को समझने पर
जितेंद्र साहू भैयाजी, कपालफोडी धमतरी ने शरीर यात्रा के प्रत्येक क्षण के सदुपयोग के लिए जीवन विद्या अध्ययन , अभ्यास और परिश्रम पूर्वक जीने पर ,नरसिंह पटेल भैयाजी पिथौड़ा ने सादगीपूर्ण और सरलता पर से रायपुर से श्री हरीश ठाकुर भैयाजी, ने मृत्यु संस्कार कार्यक्रम के प्रयोजन पर , संतराम कुर्रे कोमा खल्लारी बागबाहरा ने सच्चाई के साथ जीने के निष्ठा पर अपनी बातें रखें,व अनेक जीवन विद्या परिवार से परिजन उपस्थित रहे,सभा में उपस्थित सतनामी समुदाय व विभिन्न वर्गों के परिजनों ने जीवन विद्या अध्ययन आधारित मृत्यु संस्कार कार्यक्रम को मानव समाज के लिए तामझाम से मुक्त और अच्छा कार्यक्रम बताया, शिक्षक श्री संतराम कुर्रे कोमा, खल्लारी बागबाहरा ने वर्तमान मृत्यु संस्कार कार्यक्रम को खर्चीला और दिखावे पूर्ण बताया जबकि जीवन विद्या अध्ययन आधारित मृत्यु संस्कार कार्यक्रम में संस्कारों का महत्व, ध्वनि प्रदुषण,कोलाहल से मुक्त,सरल, सादगीपूर्ण व मानव समाज के लिए अनुकरणीय बताया उन्होंने मृत्यु संस्कार कार्यक्रम संयोजक व संचालक शिक्षक श्री गेंदलाल कोकडिया,श्री शिव कुमार जांगड़े, परिजनों व सबके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित किया है,
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