: ऋषिकेश में होने वाली गंगा आरती को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में सूचीबद्ध किया गया
Tue, Apr 2, 2024
परमार्थ निकेतन गंगा घाट पर 28 वर्षों से प्रतिदिन होती है
गंगा आरती
ऋषिकेश : Ganga Aarti : परमार्थ निकेतन घाट पर वर्ष 1997 से शुरू हुई आरती 28 वर्षों से प्रतिदिन होती है। वर्ल्ड बुक आफ रिकार्ड्स के अधिकारियों ने इस संबंध में स्वामी चिदानंद सरस्वती को प्रमाण पत्र तथा पुरस्कार प्रदान किया। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अध्यक्ष और सीईओ संतोष शुक्ला ने घोषणा की, परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋषिकेश, उत्तराखंड, गंगा आरती को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा 30 मिनट की नॉनस्टॉप दैनिक मनमोहक आरती के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। लिस्टिंग का प्रमाण पत्र स्वामी चिदानंद सरस्वतीजी, अध्यक्ष और आध्यात्मिक प्रमुख और साध्वी भगवती सरस्वती, निदेशक, अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव, परमार्थ निकेतन, भारत को अभिषेक कौशिक और प्रिया शर्मा, डब्ल्यूबीआर के अधिकारियों और अन्य द्वारा प्रदान किया गया।
परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष और आध्यात्मिक प्रमुख स्वामी चिदानंद सरस्वती ने इस पर खुशी जताते हुए कहा कि इस आरती में देशभर से लाखों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। उन्होंने कहा वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल होने का यह सम्मान यहां आने वाले भक्तों और देश के लोगों को समर्पित है। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन (यूके) द्वारा सूचीबद्ध होने पर, स्वामी चिदानंद सरस्वतीजी और साध्वी भगवती सरस्वती को केंद्रीय कार्य समिति के सदस्यों और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा बधाई दी गई।सीधे दिल में उतर जाने वाली माँ गंगा की आरती उनकी कृपा को दर्शाती है I क्योकि गंगा सिर्फ एक नदी नहीं हैI वह सचमुच एक दिव्य माँ है। वह जीवनदायिनी के रूप में हिमालय से अपने जल में पवित्रता, आनंद और मुक्ति लेकर आती है। ऋषिकेश में परमार्थ निकेतन में गंगा आरती पवित्र नदी गंगा की पूजा और अर्पण का एक दैनिक अनुष्ठान है। इसमें मंत्रों का जाप, घंटियाँ बजाना और दीपक जलाना शामिल है क्योंकि भक्त नदी में फूल और धूप चढ़ाते हैं। यह समारोह आध्यात्मिक अनुभव और गंगा से जुड़ाव चाहने वाले ऋषिकेश आने वाले पर्यटकों के लिए एक लोकप्रिय आकर्षण है।
: कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में फ्लावर फेस्टिवल आज से होगा शुरू
Sat, Mar 9, 2024
नई दिल्ली में कनॉट प्लेस, सेंट्रल पार्क में आज से दो दिवसीय फ्लावर फेस्टिवल आयोजित किया जा रहा है। इसमें 35 प्रकार के फूल शामिल किए जाएंगे। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद-एनडीएमसी के अनुसार इसका उद्घाटन उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना करेंगे। एनडीएमसी ने कहा कि इस महोत्सव में फूलों की प्रदर्शनी के अतिरिक्त लाइव बैंड संगीत भी होगा। पुष्प महोत्सव में प्रवेश निशुल्क है। एनडीएमसी के अनुसार, फ्लावर फेस्टिवल को फूलों के प्रदर्शन और सजावट के लिए 18 अलग-अलग वर्गों में विभाजित किया गया है। इसमें मुख्य आकर्षण विभिन्न मौसमों के पुष्प डहलिया, पेटुनिया, पैंसी, साल्विया, मैरी गोल्ड आदि के फूलों वाले गमले, गमले वाले पौधों का समूह, पशु/पक्षियों की पुष्प आकृतियां, रंगीन पुष्प बोर्ड, ट्रे गार्डन, बड़े आकार की हैंगिंग बास्केट, टेरारियम, इकेबाना जैसी फूलों की सजावट, पूर्वी और पश्चिमी शैली के फूलों की सजावट शामिल होगी।
: गांधी जी और भगत सिंह : सत्याग्रह और शहादत के दो दृष्टिकोण !
Sat, Mar 9, 2024
महात्मा गांधी और भगत सिंह, दोनों ही भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता थे, लेकिन उनके दृष्टिकोण और उपायों में अंतर था। भगत सिंह ने अपनी जान की आहुति दी, जबकि गांधी जी ने अपने अहिंसात्मक सिद्धांतों के पक्षपाती रूप में अपनाया। इस समझौते के बावजूद, क्यों नहीं रोकी गांधी जी ने भगत सिंह की फांसी?
अश्विनी कुमार | दक्ष
9मार्च 2024
भगत सिंह की फांसी:
भगत सिंह, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर नायकों में से एक थे।
उनकी शूरवीरता और आत्मबलिदान ने उन्हें एक महान योद्धा के रूप में उभारा। हालांकि, उनकी फांसी ने देशवासियों को गहरे शोक में डाल दिया।
गांधी और सज़ा माफ़ी:
महात्मा गांधी ने अपने जीवन में अहिंसा और सज़ा माफ़ी के मौलिक सिद्धांतों को अपनाया था। उनका यह मानना था कि शांति और सद्भाव से ही समस्याओं का समाधान हो सकता है।
इरविन समझौते के बावजूद, क्यों नहीं रोकी गांधी जी ने भगत सिंह की फांसी?
भगत सिंह, राजनीतिक गतिविधियों के क्षेत्र में सक्रिय थे और उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाई थी। इरविन समझौते के बावजूद, गांधी जी ने उनकी फांसी को रोकने का प्रयास नहीं किया।
इसमें कई कारण शामिल थे, जैसे कि दोनों के दृष्टिकोणों में अंतर, उनके विचारशीलता की विषय में विभिन्नता, और गांधी जी की अपनी सामंजस्य रखने की कोशिश।
गांधी जी का विरोध:
गांधी जी ने भगत सिंह जैसे उग्र राजनेताओं के विरुद्ध अपना विरोध जताया था।
उन्हें अहिंसा और सत्याग्रह का पालन करने का मार्ग सही लगता था, जबकि भगत सिंह ने उच्च स्तर की शक्ति और संघर्ष को अपनाया। यह विरोध गांधी जी की निर्णायक सोच को प्रभावित करता था।
गांधीजी का नज़रिया:
गांधी जी ने भगत सिंह को एक 'आत्महत्यारी' के रूप में देखा था और उन्होंने अपनी सामंजस्यवादी दृष्टिकोण को बनाए रखने का प्रयास किया। उन्हें लगता था कि भगत सिंह के प्रति सज़ा योजना के पीछे उनके राजनीतिक विचारों का प्रभाव था।
विचारशीलता का अंतर:
गांधी जी और भगत सिंह दोनों ही विचारशील व्यक्तित्व थे, लेकिन उनके दृष्टिकोण में विभिन्नता थी।
गांधी जी का आत्मनिर्भरता का सिद्धांत और भगत सिंह का संघर्ष भरा उत्साह, इन दोनों के बीच संघर्ष जीवनभर रहा।