महासमुंद:-विकसित भारत -विकसित संसार, सुखी समृद्ध व्यक्ति -सुखी समृद्ध परिवार के सोंच को चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय कोकड़ी सरकारी स्कूल महासमुन्द अपना आधार भूत लक्ष्य मानती है, राष्ट्रीय शिक्षा नीति & निपुण भारत मिशन व मध्यस्थ दर्शन आधारित जीवन विद्या अध्ययन आधारित चेतना विकास मूल्य शिक्षा के अंतर्गत मानवीय शिक्षा नीति को अक्षरशः कोकड़ी सरकारी स्कूल फालोअप करती है,इसी के तहत समग्र शिक्षा विभाग से जिले के सभी प्राथमिक विद्यालय के पुस्तकालयों को एफ एल एन अंतर्गत मिली पुस्तकों के संबंध में चर्चा करने पर प्रधान अध्यापक श्री गेंदलाल कोकडिया ने बताया कि अधिकांश पुस्तकें अकाल्पनिक हैं, ऐसे पुस्तकों को पढ़कर बच्चों का बौद्धिक विकास नहीं होगा, बच्चों में मानवीय मूल्यों का विकास नहीं होगा, बच्चों के भीतर तार्किक, प्रायोगिक और व्यवहारिक सोच-विचार उत्पन्न नहीं होगा,न ही बच्चों में सहयोग प्रवृत्ति और बड़ों का आज्ञापालन, स्वयं में विश्वास, प्रतिभा और व्यक्तित्व में संतुलन, व्यवहार में सामाजिकता,और व्यवसाय में स्वावलंबन का भाव भी विकास नहीं होगा,न ही बच्चों में सही संबोधन का विकास होगा,न ही बच्चों में कुछ अच्छा बनने के भावों का विकास होगा,श्री कोकडिया ने बताया कि पूरे संसार के चींटी से लेकर हाथी तक, मजदूर से लेकर राष्ट्रपति तक का पेट भरने वाले अन्न दाताओं , धरती के भगवानों , किसानों को लालची कहा गया है, जबकि भारतीय जीवन शैली और भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार किसान ही हैं,जो तन मन धन से देश का, प्रकृति का,हवा का, मिट्टी का, पानी का, पेड़ पौधों का, पशु-पक्षियों का,और हर मानव का सेवा करते हैं,
श्री कोकडिया के अनुसार, ऐसे अनेक पुस्तकें मिली हैं , जिनमें लकड़हारा अउ परी,बाल श्रम, बच्चों को पढ़ने जाने के बजाय समान बेचते,भोला हार गये, शंकर भगवान को क्रोधी,गधे और लोमड़ी के मध्य संवाद,कबूतर ,चिल, शिकारी के मध्य बात,मुसला और भालू का बात, जैसे अनेक बातें जिनका वास्तविक जीवन से कोई सरोकार नहीं,जो संभव ही नहीं है, ऐसे पुस्तकों को सरकारी स्कूलों में बांटकर बच्चों का मानसिक ह्रास किया जा है, कोकड़ी सरकारी स्कूल के शिक्षक श्री गेंदलाल कोकडिया, शाला प्रबंधन विकास समिति कोकड़ी ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी, संचालक समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़, संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद रायपुर, स्कूल शिक्षा मंत्री, प्राचार्य डाइट महासमुन्द, कलेक्टर महासमुन्द, जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद, विकास खंड शिक्षा अधिकारी महासमुंद से विनम्र आग्रह किया है कि ये सारी पुस्तकें स्कूलों से वापस मंगाकर पुस्तकें छापने वाली और ऐसे अकाल्पनिक कहानी बनाने वाले प्रकाशकों को सरकार वापस करे, बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ न करे, जीवन विद्या, चेतना विकास मूल्य शिक्षा आधारित, मानवीय मूल्यों, भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय संस्कृति,देश प्रेम, प्रकृति प्रेम बढ़ाने वाली पुस्तकें ही सरकार स्कूलों को भेजे, सामान्य ज्ञान बढ़ाने वाली पुस्तकें भेजें,श्री गेंदलाल कोकडिया के अनुसार जिला व राज्य फाउंडेशन लिटरेसी व न्यूमेरीसी व जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थानों, राज्य के शिक्षा विदों को सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों के पुस्तकों का गुणवत्ता बढ़ाना चाहिए न कि कुछ भी अकाल्पनिक पुस्तकें से भरना चाहिए, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद रायपुर ने १०वर्ष पहले चेतना विकास मूल्य शिक्षा की किताबें बांटी थी, जिससे बच्चों का मनोबल बढ़ा है, बच्चे मानव, परिवार, समाज, प्रकृति, आपसी भाईचारा, संबंध, मूल्य, मानवीय शिक्षा, चरित्र, स्वास्थ्य,शरीर व जीवन का अध्ययन किए, जिम्मेदारी का, ईमानदारी, समझदारी, भागीदारी का भाव आया था,श्री कोकडिया के अनुसार सरकार को वहीं पुस्तकें फिर से राज्य के सभी प्राथमिक, उच्च, मिडिल, हायर,हाई स्कूलों, महाविद्यालयों में भी वितरण करना चाहिए, उससे बच्चों का बौदुव मानसिक विकास होता है